तस्वीर में आप जिस खेत में ट्रैक्टर चलता देख रहें हैं कुछ दिन पहले तक यहां बाग में किन्नू से लदे पेड़ होते थे। लेकिन मौसम में लगातार आ रहे बदलाव व इस बार किन्नू के पेड़ों पर अधिक किन्नू से वजन ज्यादा होने केकारण किन्नू के पेड़ खराब हो गए। जिसके बाद किसान नरेंद्र डूडी को खेत में लगे हुए 7 एकड़ किन्नू के बाग को उखाडऩा पड़ा। अब किसान नरेंद्र सब्जी के अलावा अन्य फसलों की खेती करने का मन बना चुके हैं। मौसम में आए बदलाव के कारण तेजाखेड़ा गांव के 20 प्रतिशत किसानों के बाग खराब हुए हैं। इन किसानों को भी खराब हो चुके अपने बाग उखाडऩे पड़े हैं। आइए आपको सुनाते हैं कि बागवानी करने वाले किसानों की समस्या।

गांव तेजाखेड़ा में करीब 1 हजार एकड़ में किन्नू और मालटा फ्रूट की बागवानी होती है। बागवान नरेंद्र डूडी ने बताया कि किन्नू के भाव का बूरा हाल था। किन्नू की पैदावार ज्यादा थी जबकि किन्नू का भाव बहुत कम था। बम्पर पैदावार के चलते किन्नू का उठान बहुत कम हुआ। जिस वजह से किसानों को किन्नू को फेंकने के लिए मजबूर होना पड़ा। बागवान किसान नरेंद्र डूडी के मुताबिक खरीददार कम होने के कारण किसान इस बार किन्नू को नहर किनारे, सडक़ किनारे फेंकने को मजबूर हो गए। बागवानी करने वाले किसानों को इस वजह से भाव नाम मात्र ही मिल पाया। किसान नरेंद्र के मुताबिक इस बार किसान को दोहरा नुकसान उठान पड़ा। नरेंद्र बताते हैं कि किसान को भाव में नुकसान उठाना पड़ा ही दूसरी और किन्नू के बहुत अधिक उत्पादन के कारण किन्नू के पेड़ पर वजन बहुत अधिक रहा जिस वजह से बहुत बड़ी संख्या में खराब हो गए। अगर इस सीजन में किन्नू का भाव ठीक रहता तो किन्नू जनवरी तक टूट जाता और पौधों को नुकसान न पहुंचता। बागवान सही भाव मिलने का इंतजार करते रहे। किन्नू के बम्पर उत्पादन के चलते किन्नू के जो पेड़ खराब हो गए उन्हें किसानों को अब उखाडऩा पड़ रहा है। नरेंद्र डूडी ने बताया कि इस सीजन में उनके खुद के 7 एकड़ किन्नू के बाग को बहुत अधिक नुकसान पहुंचा है। जिस वजह से उन्होंने 7 एकड़ बाग को उखाड़ दिया है। अब वे इस 7 एकड़ में अन्य फसल बोएंगे। नरेंद्र बताते हैं कि उनकी तरह ही क्षेत्र में कई किसानों के बाग खराब हुए हैं। 20 प्रतिशत बाग उखाड़े गए हैं।

सरकार बागवानों को सही भाव दिलाए।
गांव तेजाखेड़ा के ही रहने वाले किसान मोहन न्यौल ने बताया कि इस बार बाग में पौधों पर किन्नू तो बहुत लगा लेकिन किन्नू की क् वालिटि बढिय़ा नहींं रही। मोहन के मुताबिक इस बार उन्हें किन्नू का भाव 5 रुपए से 6 रुपए किलोग्राम के बीच ही मिल पाया है। मौसम की मार व घटिया किस्म के किटनाशक इसकी वजह रही है। सरकार को मार्केट में घटिया किटनाशकों व बीज पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए। किसान मोहन के मुताबिक इस बार का किन्नू का सीजन उनके लिए घाटे वाला रहा है। सरकार बागवानों को बढिय़ा भाव दिलाए और बागों में इस्तेमाल होने वाली दवाईयां भी अच्छी क्क्वालिटि की उपलब्ध कराए।

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