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हमारे जमाने की राजनीति में इतना भ्रष्टाचार नहीं था। नेताओं को लोग बेईमान भी नहीं मानते थे। लोगों के दिलों में नेताओं के प्रति काफी सम्मान होता था। लेकिन मौजूद समय की राजनीति जनसेवा की न होकर पैसा कमाने का माध्यम बन चुकी है। ये शब्द हैं सादगी पंसद 98 वर्षीय पूर्व विधायक सहीराम बिश्रोई के। बिश्रोई संयुक्त पंजाब के समय 1957 में जनसंघ की टिकट पर अबोहर से विधायक चुने गए थे। सहीराम बिश्रोई बताते हैं कि उन्होंने पूर्व उप प्रधानमंत्री स्व. देवीलाल के कहने पर राजनीति ज्वाइन की और चुनाव लड़ा।
98 की उम्र में खेत में करते हैं काम।
सहीराम बिश्रोई बताते हैं कि बलराम दास टंडन उनके साथी विधायकों में से एक हैं। 1957 में जब वे पंजाब के अबोहर से विधायक बने तो उसी विधानसभा में अमृतसर पश्चिम की सीट से बलराम टंडन विधायक बने। बाद में बलराम टंडन छत्तीसगढ़ के गर्वनर भी बने। पूर्व विधायक सहीराम बिश्रोई को खेत में काम करते देख कर कोई नहीं सकता कि ये बुजुर्ग पूर्व विधायक रह चुके हैं। राजनीति में रहकर भी सहीराम बिश्नोई ने मौजूदा समय के नेताओं की तरहं सम्पति नहीं बनाई। जब तक वे राजनीति में रहे उन्होंने जीवन में ईमानदारी को अपनाए रखा। जहां वर्तमान दौर की राजनीति से जुडऩे का मतलब समाज सेवा की बजाय रईसी हो गया है। ऐसे समय में पूर्व विधायक की सादगी का यह अनूठा उदाहरण किसी ने देखना हो तो वह सिरसा जिला के डबवाली उपमंडल के उनके गांव सक्ताखेड़ा में चला आए। यहां उनका खेत में साधारण सा मकान है। जहां सहीराम बिश्राई रहते हैं।

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