लोक धुन। डबवाली
भाजपा प्रत्याशी आदित्य देवीलाल डबवाली से सरकार द्वारा विकास के मामले में किए गए भेदभाव को छिपाने के लिए मेरे खिलाफ झूठा प्रचार करके डबवाली जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। यह बात वार्ड 14 के नगर पार्षद विनोद बांसल ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कही। उन्होंने कहा कि आदित्य देवीलाल हर जनसभा में इस बात का उल्लेख करते हैं कि विनोद बांसल चार बार पार्षद पद पर काबिज रहे हैं। लेकिन उन्होंने नगर परिषद की बैठकों में प्रस्ताव तक लिखवाने नहीं आते।
उन्होंने कहा कि आदित्य देवीलाल स्वयं जिला पार्षद हैं और उन्हें अच्छी तरह से मालूम है कि पार्षद का काम केवल प्रस्ताव पास करवाना होता है। उसे लिखना और उसे लागू करवाना अधिकारियों का काम होता है। वर्ष 2014 से 2019 तक कार्यकारी अधिकारी या सचिव का पद तीन वर्ष तक रिक्त पड़ा रहा और दो वर्ष में 6 कार्यकारी अधिकारी बदले गए। नगर परिषद में कार्यकारी अभियंता का पद पूरे पांच वर्ष खाली रहा तथा चुनाव के समय कार्यकारी अभियंता की नियुक्ति की गई। पालिका अभियंता का पद तीन वर्ष तक रिक्त रहा और दो वर्ष में तीन पालिका अभियंता नियुक्त किए गए। इसी प्रकार कनिष्ठ अभियंता पर केवल एक वर्ष तक स्थाई अधिकारी लगाए गए जो अधिकतर अवकाश पर रहे। कनिष्ठ अभियंता का कार्य आऊट सोर्सिज पर रखे गए अधिकारी से करवाने की कौशिश की गई।
बांसल ने कहा कि वर्तमान नगर परिषद के तीन वर्ष के कार्यकाल में हाऊस की 15 बैठकों का आयोजन किया गया। जिसमें से दो बैठकें रद्द हो गई। तीन बैठकों का अनुमोदन जिला उपायुक्त ने नहीं किया। बाकी दस बैठकों का अनुमोदन उपायुक्त ने बैठकों के 9-10 माह बाद किया। यदि बैठकों प्रस्ताव उधूरे डाले गए थे तो उपायुक्त ने उनका अनुमोदन कैसे कर दिया? सरकारी अधिकारियों ने स्थानीय भाजपा नेताओं के कहने पर डबवाली से सौतेला व्यवहार किया। नगर परिषद की बैठकों में शहर की सफाई व्यवस्था को सुचारू करने के लिए 20 प्रस्ताव उपायुक्त के अनुमोदन के बाद अभी तक लंबित हैं। शहर के लगभग 150 विकास कार्यों के प्रस्ताव अधिकारियों के काम न करने के कारण लंबित हैं। आदित्य देवीलाल यह बताएं कि नगर परिषद हाऊस की या पार्षदों की कहां पर गलती है। शहर के विकास को रोकने का कार्य भाजपा नेताओं के इशारे पर सरकारी अधिकारियों ने किया। आदित्य देवीलाल को किसी पर बेबुनियाद आरोप लगाने पर उस कार्य पर अध्यन जरूर करना चाहिए। बिना किसी जानकारी जुटाए यूं ही जनभावनाओं का अनादर करना उचित नही है।
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