PHOTO: बिश्रोई सभा सिरसा अमरीक बिश्रोई को प्रशस्ति एवं सम्मान पत्र देकर सम्मानित करते हुए

भाखड़ा नहर में कूदी बुजुर्ग महिला की जान बचाने वाले इस रियल हिरो को बिश्रोई सभा ने किया सम्मानित

लोक धुन। डबवाली
हमारे समाज में इंसानियत और जिंदादिली आज भी जीवित है। समाज में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो जिन्हें अपनी जान पर खेलेकर दूसरों की जान बचाने का जुनून है। इसी फेहरिस्त में गांव मौजगढ़ के रहने वाले अमरीक बिश्रोई का भी नाम आता है। इसकी एक बानगी बीती 24 अगस्त को डबवाली उपमंडल के गांव मौजगढ़ की भाखड़ा नहर पर देखने को मिली। 24 अगस्त दिन शनिवार की सुबह भाखड़ा नहर के पानी में डूब रही गांव बिज्जुवाली की 65 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला को गांव मौजगढ़ निवासी अमरिक बिश्रोई ने नई जिंदगी दी थी। अमरिक बिश्रोई के इस हौसले की चारों और खुब सराहना हुई। उनके इसी हौसले को देखते हुए बिश्रोई सभा ने उन्हें सम्माति किया है।

बिश्रोई सभा ने की प्रशंसा।
बिश्रोई सभा सिरसा द्वारा अमरीक बिश्रोई को दिए गए प्रशस्ति एवं सम्मान पत्र पर लिखा गया है कि आपने गांव के पास से गुजरती भाखड़ा मुख्य नहर में गिरी एक अनजान औरत को अपनी जान की परवाह न करते हुए तुरंत नहर से छलांग लगाकर अपनी पीठ पर उसे लादकर बाहर ले आए। महिला को अस्पताल पहुंचाकर उसके परिजनों को सूचना दी। इस साहसिक व सार्थक प्रयास के लिए बिश्रोई सभा सिरसा आपकी प्रशंसा करते हुए तहेदिल से सम्मान करती है।

अमरिक ने 10 साल पहले तैरना छोड़ दिया था।
बीती 24 अगस्त को गांव मौजगढ़ के रहने वाले अमरीक बिश्रोई अपने भतीजे रजनिश बिश्रोई के साथ शनिवार सुबह खेत गए थे। वापसी में उनके भतीजे ने नहर के पानी में डूबते हुए महिला को देखा। महिला कभी पानी के भीतर जा रही थी तो कभी महिला का सिर पानी के बाहर दिखाई दे रहा था। महिला को डूबता देख अमरीक बिश्रोई ने भी नहर में उतरने का फैसला किया। तब तक अमरीक बिश्रोई के भतीजे ने सडक़ किनारे नहर से टैंकर में पानी भर रहे लोगों को भी मदद के लिए मौके पर बुला लिया। अमरिक बिश्रोई ने नहर में छलांग लगाई तो उनका पैर पानी के भीतर जमा काई व जाले में फंस गया। जिससे एक बार उनके शरीर का संतुलन गड़बड़ा गया। लेकिन कड़ी मशक्कत से उन्होंने महिला को नहर किनारे तक ले आने में सफलता हासिल की। इसके बाद मौके पर मौजूद लोगों के गमछे से रस्सी बनाई गई। रस्सी के सहारे अमरीक ने बुजुर्ग महिला को अपनी कमर पर लादकर रस्सी पकडक़र नहर से बाहर निकले। अमरीक बिश्रोई के मुताबिक गनीमत रही कि नहर की बंदी थी। इस वजह से पानी का बहाव कम था। लेकिन इसके बावजूद भी नहर के बीचों-बीच 10 से 12 फिट पानी था। अमरीक बिश्रोई ने बताया कि उन्होंने 10 वर्ष पहले तैरना छोड़ दिया था। लेकिन महिला को डूबता देख उन्होंने मानवता के नाते नहर में छलांग लगाने का फैसला किया।

जीवों की रक्षा को लेकर भी रहते अव्वल।
गांव मौजगढ़ के रहने वाले अमरिक बिश्रोई जीवों की रक्षा को लेकर भी सक्रिय रहते हैं। जब भी आवारा कुत्तों के आतंक से नील गाय खेतों में जख्मी हो जाती है तो वे तुरंत गाड़ी से उसे अपने घर लेकर आते हैं। इसके आलवा पशु चिकित्सक को बुलाकर उसका उपचार करवाते हैं। इसके बाद उसे कुछ दिनों के लिए गौशाला में भिजवा देते हैं। अमरिक बिश्रोई अखिल भारतीय बिश्रोई जीव रक्षा सभा के जिला उपाध्यक्ष भी हैं। अमरिक बिश्रोई ने खुद की जान दांव पर लगाकर बुजुर्ग महिला को नई जिंदगी दी तो उनके इस कार्य की चारों तरफ सराहना हो रही है।

Check Also

पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के न्यायाधीश संजय वशिष्ठ ने शनिवार को सिरसा व उपतहसीलों की अदालतों का किया ओचक निरीक्षण

Haryanakisantv.com पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के न्यायाधीश एवं इन्सपेक्टिंग जज संजय वशिष्ठ ने शनिवार …