By राजेंद्र कुमार।
हरियाणा के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा अबकी बार लोकसभा चुनाव में परोक्ष भागीदारी से बच रहा है। डेरा प्रमुख के साध्वी यौन शौषण मामले में सलाखों के पीछे चले जाने के बाद डेरा सच्चा सौदा की राजनीतिक विंग के पदाधिकारी चोरी छुप्पे डेरा से बाहर गुप्त बैठकें कर अपना सियासी वर्चस्व बचाने के नुस्खे ढूंढ रहे हैं।
डेरा ने अपने इतिहास में पहली बार पिछले लोकसभा चुनाव के बाद हरियाणा विधानसभा में खुलकर भाजपा को समर्थन दिया मगर न्यायालय की डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहिम पर लटकती तलवार से नहीं बचा पाया जिससे डेरा के अनुयायी भाजपा को कोस रहे हैं । सूत्रों की माने तो अबकी बार डेरा की सियासी विंग एक पार्टी को समर्थन देने की बजाय अलग-अलग दलों के उम्मीदवारों के फार्मूले को फिर लागू कर रहा है।
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख के साध्वी यौन शौषण व पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में सजा होने के बाद डेरा के पूर्व साधू रणजीत सिंह कोलियां के मर्डर की फाईल आज भी सीबीआई की विशेष कोर्ट में विचाराधीन है,इसलिए सीधे तौर पर डेरा भाजपा से पंगा लेने के मुड में नहीं है। डेरा प्रमुख के जेल चले जाने के बाद प्रबधंक मंडल को भय सता रहा है कि कहीं पेंडिग पड़े केस में डेरा प्रमुख के परिवार को ही ना लपेट दिया जाए। डेरा प्रमुख के परिवार को सुरक्षित रखने के लिए डेरा की सियासी विंग के इशारे पर डेरा परिसर से बाहर नामचर्चाओं के बहाने डेरा अपनी सियासी व्यूह रचना रच रहा है। दो रोज पहले सिरसा के एक मैरिज पैलेस में नामचर्चा का आयोजन करने के बाद अब डेरा के स्थापना दिवस के बहाने कोई बड़ा आयोजन 29 अप्रैल को सिरसा में ही मनाने के लिए तैयारियां की जा रही है,अब यह आयोजन डेरा परिसर में किया जाए या बाहर इस पर मंथन किया जा रहा है।
वहीं डेरा सच्चा सौदा के वोटों पर गिद्ध नजर लगाए बैठे विभिन्न दलों के नेता डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहिम के जेल चले जाने के बाद व डेरा की सियासी विंग के कमांडर राम सिंह के भी मुकदमों के डर के मारे भूमिगत हो जाने की स्थिति में नेता वोट के लिए नाक रगडऩे के ठोर ढूंढते फिर रहे हैं। डेरा सच्चा सौदा में नेताओं के उडऩखटोलों के लिए बनाए गए विशेष हैलीपेड पर अब तक एक भी हैलीकॉप्टर नहीं उतर पाया है जिससे उस पर धूल चढ़ गई है। सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा में अक्सर हरियाणा,पंजाब,दिल्ली,राजस्थान,चंडीगढ़,उत्तर प्रदेश राज्यों के राजनेता डेरा प्रमुख से आशीर्वाद लेने आते थे। वही, दूसरी ओर डेरा के वोटों के पैकेज को पाने के लिए सभी दल अपने स्तर पर प्रयासरत्त हैं। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला कह चुके हैं कि डेरा से जुड़े अनुयायी भी देश की प्रजातांत्रिक प्रणाली का हिस्सा है, इसलिए उनसे वोट मांगने में कोई गुरैज नहीं है। इसी तरह इनैलो नेता अभय चौटाला का कहना है कि डेरा प्रमुख की साध्वी मामले में पेशी के बाद भड़की हिंसा में जान गवाएं लोगों को मुआवजा व परिवार की सुरक्षा को लेकर सर्वप्रथम उन्होंने ही विधानसभा की पटल पर बात रखी थी,आज वोट मांगना बुराई नहीं है। वहीं दो रोज पहले सिरसा के एक मैरिज पैलेस में डेरा की नामचर्चा में पहुंची हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान अशोक तंवर की पत्नि अवंतिका तंवर ने कहा कि वे हमेशा से ही डेरा के साथ जुड़े हैं कई बार डेरा प्रमुख की रूबरू नाईट देखी वहीं अन्य आयोजनों में उनका परिवार शिरकत करता रहा है। उन्होंने स्वयं को डेरा का श्रद्धालु तक बताया। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार वोटों के लिए नेता व डेरा के प्रबंधक मंडल के लोग जितने मर्जी पापड़ बेल लें मगर डेरा प्रमुख को वोटों के बदले जेल की सलाखों से बाहर निकलना शायद इतना आसान नहीं है?
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